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Romanos 4

िअबिकत

1 हम अपनरपिअबिषय ें कहें—इस िषय ें उनकअनभव? 2 यदि ों अबिकत्‍वह इसकघमअवशकर सकते, िंपरमवर मननहीं. 3 पविै? अबपरमवर ें ििऔर इसउनकिकतें यतगई.4:3 उत्प 15:6

4 मजमजउसकउपहनहीं, अधिै. 5 वह यकि, यवसलन नहीं करतिंपरमवर ें, अधरििकरतैं, िकरतै, इसिधरयकि ें यत्‍करतै. 6 उस यकि धनयतवरणन िै, िपरमवर यवसलन करनपर धरििा:

7 धनैं े,

िनकअपरषमकर िगए,

िनकों ांिगयै.

8 धनवह यकि,

िसकों िरभकभेंे.4:8 स्तोत्र 32:1, 2

9 यह आशें तनों तक िइसमें तनरहििैं? हममत यह ै: अबिउनकिकतें यतगई. 10 उनें यह यतिअवसें गई ी? जब उनकतनतब जब वह तनरहिे? तनअवसें नहीं परतनरहिअवसें. 11 उनोंतनिििकतहरउस समय ्‍िा, जब वह तनरहिइसकउदउनें उन सबकिा-वररतििि, ितनिकरेंे, ि इस िउनकिकतें यत्‍ो; 12 अबउन तनििें रतििि, तनिनहीं परहमिअबउस िवभरखतैं, उनोंअपनतनपहलिा.

13 उस रतिआध, अबतथउनकशजों गई ि अबिोंे, यवसनहीं परििकती. 14 यदि यवसलन करनउनें ्‍िखलऔर रतिअसर िगई ै. 15 यवसििंजहां यवसनहीं, वहां यवसउलघन भव नहीं!

16 परिमसवरिउस रतिआधै, ि परमवर अनरह ें अबसभशजों यह रतििि्‍सके—वल उनें, यवसअधैं परउनें ी, िनकिै, अबा, हम सभरपिैं. 17 ि पविै: "ैंें अनों िठहरै."4:17 उत्प 17:5 हमरपिअबउनीं परमवर ें ििा, मरवन ैं तथअसिें आनआजउनें ैं, ैं नहीं.

18 िलकििि ें अबउनसगई इस रतिअनउस आशें ििा: वह अनों ों िोंे, ऐसोंशज.4:18 उत्प 15:5 19 अबनति उनकशरमरदशें ोंि उनकआयलगभग वरतथगरी. िवह िें कमजनहीं . 20 उनोंपरमवर रतिें अपनिें िचलिकर, वयउसमें मजबकरतपरमवर महि21 तथतरह ििंरहि वह, िोंयह रतिै, उसकरनें मरैं. 22 इसलिअबियहििकतगई. 23 उनकििकतगई, शबउनीं िषय ें नहीं ैं, 24 परइनकहमसै, िें परमवर ओर िकतयत्‍ी—हम, िोंिउनमें िै—िोंहमरभमसमरििा, 25 हमअपरों रण िौंगए तथहमें धरिकरिििगए.

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