परभू भोज के बारे म निरदेस
17 अब जऊन बात मेंह तुमन ला लिखत हवंव, ओमा मेंह तुम्हर बड़ई नइं करंव, काबरकि कलीसिया के सभा म तुमन जूरथव, त भलई करे के बदले जादा नुकसान करथव। 20 जब तुमन एक संग जूरथव अऊ जऊन चीज ला खाथव, ओह परभू भोज नो हय, 21 काबरकि हर मनखे ह दूसर ला अगोरे बिगर खा लेथे। कोनो तो भूखन रही जाथे अऊ कोनो मतवार हो जाथे। 22 खाय-पीये बर का तुम्हर घर नइं ए? या फेर तुमन परमेसर के कलीसिया ला तुछ समझथव अऊ जऊन मन करा कुछू नइं ए, ओमन के अपमान करथव। मेंह तुमन ला का कहंव? ये बात बर का मेंह तुम्हर बड़ई करंव? बिलकुल नइं।
27 एकरसेति, जऊन ह गलत ढंग ले परभू के रोटी ला खाथे या ओकर कटोरा म ले पीथे, त ओह परभू के देहें अऊ लहू के बिरोध म पाप करे के दोसी ठहिरथे। 29 काबरकि जऊन ह परभू के देहें के महत्व ला समझे बिगर, रोटी ला खाथे अऊ कटोरा म ले पीथे, ओह अपन ऊपर दंड लाथे। 30 एकरे कारन तुमन ले कतको झन दुरबल अऊ बेमार पड़े हवंय अऊ कतको झन तो मर घलो गे हवंय।
33 एकरसेति, हे मोर भाईमन हो, जब तुमन परभू भोज खाय बर जूरथव, त एक-दूसर खातिर अगोरव।