4 मया ह धीरज धरथे अऊ येह दयालु ए। मया ह जलन नइं रखय, येह डींग नइं मारय, अऊ येह घमंड नइं करय। 5 मया ह खराप बरताव नइं करय; येह अपन खुद के भलई नइं देखय, येह जल्दी गुस्सा नइं होवय; येह काकरो बात के बुरा नइं मानय।
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4 मया ह धीरज धरथे अऊ येह दयालु ए। मया ह जलन नइं रखय, येह डींग नइं मारय, अऊ येह घमंड नइं करय। 5 मया ह खराप बरताव नइं करय; येह अपन खुद के भलई नइं देखय, येह जल्दी गुस्सा नइं होवय; येह काकरो बात के बुरा नइं मानय।