12 यदि आने मन तुम्हर ले ये मदद लेय के अधिकार रखथें, त का हमर अऊ घलो जादा हक नइं बनय?
पर हमन ये अधिकार के उपयोग नइं करेंन। एकर बदले, हमन जम्मो बात ला सहे हवन ताकि हमन मसीह के सुघर संदेस के परचार म कोनो बाधा झन होवन। 13 का तुमन नइं जानव कि जऊन मन मंदिर म काम करथें, ओमन ला मंदिर म ले खाना मिलथे, अऊ जऊन मन बेदी म सेवा करथें, ओमन ला बेदी म चघाय गे चीज म ले बांटा मिलथे? 14 ओहीच किसम ले, परभू ह हुकूम दे हवय कि जऊन मन सुघर संदेस के परचार करथें, ओमन के भरन-पोसन सुघर संदेस म ले होवय।
15 पर मेंह येमा ले कोनो भी अधिकार के उपयोग नइं करेंव। अऊ मोर लिखे के ये मतलब नो हय कि तुमन मोर बर अइसने करव। काबरकि मेंह मर जाना पसंद करहूं, एकर बनिस्पत कि कोनो मोर ये घमंड ला बेकार समझय। 16 तभो ले जब मेंह सुघर संदेस के परचार करथंव, त येह मोर बर कुछू घमंड के बात नो हय, काबरकि परचार करे बर, मेंह बाध्य अंव। यदि मेंह सुघर संदेस के परचार नइं करंव, त मोर ऊपर धिक्कार ए। 17 यदि मेंह अपन ईछा ले परचार करथंव, त मोर बर एक ईनाम रखे हवय; पर यदि मेंह अपन ईछा ले येला नइं करंव, त मेंह सिरिप ओ जिम्मेदारी ला पूरा करत हंव, जऊन ला परभू ह मोला सऊंपे हवय। 18 तब का ए मोर ईनाम? सिरिप ये कि मेंह सुघर संदेस के परचार मुफत म करंव, अऊ एकर परचार करे म अपन अधिकार के उपयोग नइं करंव।