5 हे जवानमन, तुमन घलो ओही किसम ले सियानमन के अधीन रहव। एक-दूसर के संग नमरता ले बरताव करव, काबरकि,
"परमेसर ह घमंडी मनखे के बिरोध करथे,
पर नम्र मनखेमन ऊपर अनुग्रह करथे।"
6 एकरसेति, परमेसर के सामर्थी हांथ के तरी अपनआप ला नम्र करव, ताकि ओह तुमन ला उचित समय म बढ़ावय। 7 अपन जम्मो चिंता ला ओकर ऊपर छोंड़ देवव, काबरकि ओह तुम्हर खियाल रखथे।