4 पर ओह खुद आघू सुनसान जगह म एक दिन के रसता चलिस। ओह एक झाऊ के झाड़ी करा आके ओकर खाल्हे म बईठ गीस अऊ ये कहिके पराथना म अपन मिरतू मांगे लगिस, "हे यहोवा, बहुंत हो गे; अब मोर परान लेय ले, काबरकि मेंह अपन पुरखामन ले बने नो हंव।"
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4 पर ओह खुद आघू सुनसान जगह म एक दिन के रसता चलिस। ओह एक झाऊ के झाड़ी करा आके ओकर खाल्हे म बईठ गीस अऊ ये कहिके पराथना म अपन मिरतू मांगे लगिस, "हे यहोवा, बहुंत हो गे; अब मोर परान लेय ले, काबरकि मेंह अपन पुरखामन ले बने नो हंव।"
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