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1 Samuel 1

10 हनअपन मन बहुंयहपरथनकरन लगि, अऊ िलख-बिलखकवन लगि11 अऊ ओह कहत मननत ि, "यहसरवसकि, यदि ें अपन सहखबअऊ ि े, अऊ अपन नइलबपर ओलएक े, ेंओलओकर िनगभर बर यहअरपन कर ूं, अऊ ओकर कभउसतरिरन नइी।"

12 जब ओह यहआघअइसनपरथनकरत िि, एलओकर ूं ि खत िि13 हनअपन मन परथनकरत िि, ओकर लत ििओकर अवनइनई पडििएलसमझिि ओह नसहवय 14 अऊ ओलकहि, "ें कब तक नसरहिे? अपन नसउत"

15 हनकहि, "ि, अइसनहय, ेंएक िईलगन ेंअऊ अऊ ; ेंअपन मन लकयहकहत रहें16 अपन ईलगन झन समझ; ेंअबबडअऊ इहां परथनकरत रहें"

17 एलकहि, "ांि ा, इसरयल परमसर मनचबरदवय"

18 ओह कहि, "नजर अनरह वय" तब ईलगन चलअऊ वन करि, अऊ ओकर ूं उदनइिि

19 सर िबड़े िहनिां ओमन उठकयहआघअरधनकरिअऊ तब अपन घर लहुंएलकअपन घरवहनकर, अऊ यहहनि 20 तब िहनें ईस अऊ एक जनम ओह कहत ओकर ांसमएल1:20 समूएल इबरानी म परमेसर के दुवारा सुने गय रखि, "बरकि ेंयहांें"

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