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1 समूएल 1:6,7,10,11,20

6 काबरकि यहोवा ह ओकर कोख ला बंद कर दे रिहिस, एकर खातिर ओकर सऊत ह ओला चिढ़ाके दुख देवय। 7 अइसने बहुंते साल तक चलते रिहिस। जब भी हन्ना ह यहोवा के भवन म जावय, त पनिन्ना ह ओला चिढ़ावय; जेकर कारन हन्ना ह रोवय अऊ खाना-पीना छोंड़ देवय।

10 हन्ना ह अपन मन म बहुंत दुखी होके यहोवा ले पराथना करन लगिस, अऊ बिलख-बिलखके रोवन लगिस। 11 अऊ ओह ये कहत मन्नत मानिस, "हे यहोवा सर्वसक्तिमान, यदि तें अपन दासी के दुख ला सही म देखबे अऊ मोर सुधि लेबे, अऊ अपन दासी ला नइं भूलबे पर ओला एक बेटा देबे, त मेंह ओला ओकर जिनगी भर बर यहोवा ला अरपन कर दूहूं, अऊ ओकर मुड़ म कभू उस्तरा फिरन नइं पाही।"

20 तब कुछू दिन के बाद हन्ना देहें म होईस अऊ एक बेटा ला जनम दीस। ओह ये कहत ओकर नांव समूएल1:20 समूएल इबरानी म परमेसर के दुवारा सुने गय रखिस, "काबरकि मेंह येला यहोवा ले मांगेंव।"

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