एली के दुस्ट बेटामन
12 एली के बेटामन दुस्ट मनखे रिहिन; ओमन के मन म यहोवा बर कोनो आदर नइं रिहिस। 13 उहां पुरोहितमन के ये रिवाज रिहिस कि जब भी कोनो मनखे बलिदान चघावय, त पुरोहित के सेवक ह मांस चुरे के बेरा म एक तीन दांतवाला कांटा अपन हांथ म धरके आवय 14 अऊ ओला कढ़ाही, या करसी, या करसा, या धमेला के भीतर डुबोवय। अऊ जतेक मांस कांटा म फंसके ऊपर आवय, ओला पुरोहित ह अपन बर ले लेवय। ये किसम ले ओमन ओ जम्मो इसरायलीमन संग बरताव करंय, जऊन मन सीलो म आवंय। 15 अऊ इहां तक कि चरबी ला जलाय के पहिली, पुरोहित के सेवक ह आके बलिदान करइया मनखे ला कहय, "भूंजे बर पुरोहित ला कुछू मांस दे; ओह तोर ले चुरे हुए मांस ला नइं लेवय, पर सिरिप कच्चा मांस ला लीही।"
16 अऊ कहूं ओ मनखे ह सेवक ला कहय, "पहिली चरबी ला जरन दे, तब तें जो चाहथस, ओला ले जा सकथस," तब सेवक ह जबाब देवय, "नइं, अभी दे; यदि नइं देवस, त मेंह येला छीनके ले जाहूं।"
17 ओ जवानमन के ये पाप ह यहोवा के नजर म बहुंत बड़े रिहिस, काबरकि ओमन यहोवा के भेंट के अपमान करत रिहिन।