16 ये बात म कोनो संका नइं ए कि परमेसर के भक्ति के भेद ह महान ए:
ओह मनखे के रूप म परगट होईस,
पबितर आतमा के दुवारा साबित करे गीस,
स्वरगदूतमन ला दिखाई दीस,
जाति-जाति म ओकर परचार होईस,
जम्मो संसार म मनखेमन ओकर ऊपर बिसवास करिन,
अऊ ओह महिमा म स्वरग ऊपर उठा लिये गीस।