2 पास्टर ला बिलकुल निरदोस होना चाही। ओकर सिरिप एकेच घरवाली होवय। ओह संयमी, सुसील, सभ्य, पहुनई करइया अऊ बने गुरू होवय। 3 ओह पियक्कड़ या मारपीट करइया झन होवय, पर नम्र सुभाव के होवय। ओह न झगरा करइया अऊ न रूपिया-पईसा के लोभी होवय।
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1 तीमुथियुस 3
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