16 काबरकि परभू ह खुद स्वरग ले उतरही। ओकर आय के बेरा म ऊंचहा अवाज म हुकूम दिये जाही, परधान स्वरगदूत के अवाज होही अऊ परमेसर के तुरही बजही अऊ जऊन मन मसीह म बिसवास करके मर गे हवंय, ओमन पहिली जी उठहीं। 17 ओकर बाद, हमन बिसवासीमन जऊन मन जीयत हवन अऊ बांचे हवन, ओमन के संग बादर म उठा लिये जाबो ताकि परभू के संग हवा म भेंट करन। अऊ ये किसम ले हमन हमेसा परभू के संग रहिबो। 18 एकरसेति, एक-दूसर ला, ये बातमन के दुवारा उत्साहित करव।
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