9 पर ओह मल कहस, "मर अनगरह ह तर बर बहत ए, कबरक मर समरथ ह दरबलत म सदध हथ।" एकरसत खस ल, मह अपन दरबलत क ऊपर अऊ घमड करह, तक मसह क समरथ ह मर ऊपर बन रहय। 10 एकर करन मसह क हत म मह दरबलत म, बजतत म, तकलफ म, सतव म अऊ कठनई म खस रहथव। कबरक जब मह दरबल हव, तभ मह बलवन अव।
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