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2 कुरिन्थुस 5:1-10

स्वरग म हमर निवास

1 हमन जानथन कि ये संसारिक देहें जऊन म हमन रहिथन, जब नास करे जाही, तब परमेसर कोति ले हमन ला एक भवन मिलही; अऊ येह स्वरग म सदाकाल के घर ए, जऊन ह मनखे के हांथ के बनाय नो हय। 2 इहां रहत हमन दुख म कलहरत हवन अऊ हमर स्वरगीय घर ला पहिरे के ईछा रखथन। 3 अऊ जब हमन येला पहिरबो, त हमन नंगरा नइं पाय जाबो। 4 ये देहें म रहे के दौरान, हमन कलहरत रहिथन अऊ बोझ ले दबे रहिथन, काबरकि हमन बिगर कपड़ा पहिरे नइं रहे चाहन, पर हमन स्वरगीय घर ला पहिरे चाहथन, ताकि नासमान देहें ह सदाकाल के जिनगी म बदल दिये जावय। 5 ये उदेस्य खातिर जऊन ह हमन ला बनाय हवय, ओह खुद परमेसर ए अऊ ओह हमन ला सदाकाल के घर के गारंटी के रूप म पबितर आतमा दे हवय।

6 एकरसेति, हमन हमेसा भरोसा करथन अऊ जानथन कि जब तक हमन ये देहें के घर म रहिथन, तब तक हमन परभू ले दूरिहा हवन। 7 अब हमन कोनो चीज ला देखके नइं, पर बिसवास के दुवारा चलथन। 8 हमन ला भरोसा हवय अऊ हमन ये देहें के घर ले अलग होके परभू के संग रहई अऊ बढ़िया समझथन। 9 एकरसेति, चाहे हमन ये देहें के घर म रहन या एकर ले अलग रहन, हमर उदेस्य ये अय कि हमन परभू ला खुस रखन। 10 काबरकि हमन जम्मो झन ला मसीह के नियाय आसन के आघू म जाना जरूरी ए, ताकि हर एक मनखे सरीर म रहत, जऊन काम करे हवय, चाहे भलई के काम होवय या बुरई के, ओला ओकर परतिफल मिलय।

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