उदार मन ले बोवव
6 ये बात ला सुरता रखव: जऊन ह थोरकन बोथे, ओह थोरकन काटही घलो, अऊ जऊन ह बहुंत बोथे, ओह बहुंते काटही घलो। 7 हर एक मनखे वइसने ही दान करय, जइसने ओह अपन मन म ठाने हवय; न अनिछा ले अऊ न ही दबाव ले, काबरकि परमेसर ह ओकर ले मया करथे, जऊन ह खुसी मन ले देथे। 8 परमेसर ह तुमन ला जम्मो किसम के आसीस बहुंतायत ले देय म सामर्थी अय, ताकि तुम्हर करा जरूरत के हर चीज हमेसा बहुंतायत म रहय अऊ तुमन हर एक बने काम म बहुंतायत से दे सकव।