17 ओमन के सिकछा ह सरहा घाव सहीं बगरत जाथे। हुमिनयुस अऊ फिलेतुस इही मन ले अंय 18 अऊ येमन सत के बचन ले दूरिहा हो गे हवंय। येमन कहिथें कि मरे मनखेमन के जी उठई त पहिले ही हो चुके हवय अऊ अइसने कहिके, येमन कुछू मनखेमन के बिसवास ला नास कर देथें।
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