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2 Tessalonicenses 2

अधरममनख

1 ईमन, हमर परभमसआय अऊ ओकर करहमर िसय हमन हर िनतकरथन 2 ि आतमबचन िकहि परभिपहिहवय अऊ हमर इहां आय हवय सहीं लगथे, मन आसिझन पडअऊ झन घबरवव3 मन घलिसम झन वन वय, बरकि ितब तक नइआवय, जब तक ि परमसर िपहििदरनइवय, अऊ अधरम2:3 कुछू हस्तलिपि म पाप मनखपरगट नइवय, कर ितय हवय4 ओह हर िकरहअऊ अपनआप बड़े करही, जऊन परमसर कहकर अरधनकरे। अऊ अऊ ओह अपनआप परमसर कहत, परमसर िबईठही।

5 मन रतनइि जब ेंहर रहें, ेंमन तमन बतकरत रहें? 6 अब मन नत हव ि सकि ओलकत हवय, ि ओह परमसर ठहिसमय परगट वय7 बरकि अधरम भरसकि पहिकरत हवय, पर जऊन अब ओलहवय, ििओह तब तक रहिी, जब तक ि ओलरसतहटनइी। 8 अऊ तब अधरमपरगट ी, जऊन परभअपन ूं ूंरहअऊ अपन परगट ओलकर ी। 9 अधरमसकि आहअऊ जमिसम चमतक, लबरिनहां अऊ अचरज करही, 10 अऊ वइयमन जमिसम वइयखररही। ओमन ीं बरकि ओमन सत मयकरबर नइि, कर ओमन उदरहिि11 एकर रन, परमसर ओमन ऊपर एक भरमइयसकि पठी, ि ओमन लबऊपर िसवकर12 अऊ जमझन सजीं, जऊन मन सत ऊपर िसवनइकरिअऊ अधरम ईन

िसवमजबबनरहव

13 पर ईमन, मन परभमयकरथे; हर िहमन हमपरमसर धनबकरनी, बरकि ििे, परमसर मन ि पबितर आतमपबितर अऊ सत हर िसवकरमन उदवव14 एकर ि, ओह मन हमर घर बलईस, ि मन हमर परभमसमहिवव

15 एकरसि, ईमन, िसवमजबबनव अऊ िकछतमन रहव, जऊन हमन ूं बचन िमन िहवन

16 हमर परभमसअऊ परमसर हमर ददा, जऊन हमर मयकरिअऊ अपन अनरह हमन सदउतअऊ उततम आसहवय, 17 हर हर एक घर अऊ बचन हर मन उतिअऊ मजबकरय

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2 Tessalonicenses
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