51 "हे ढीठ मनखेमन! तुमन हिरदय म परमेसर के संदेस ला सुने नइं चाहत हव। तुमन हमेसा पबितर आतमा के बिरोध करथव, जइसने तुम्हर पुरखामन करत रिहिन।
51 "हे ढीठ मनखेमन! तुमन हिरदय म परमेसर के संदेस ला सुने नइं चाहत हव। तुमन हमेसा पबितर आतमा के बिरोध करथव, जइसने तुम्हर पुरखामन करत रिहिन।