22 हे गुलाममन हो, हर एक बात म अपन-अपन मालिक के हुकूम मानव। सिरिप जब ओमन तुमन ला देखत रहिथें या सिरिप मनखेमन के दिल जीते बर ही ये काम झन करव, पर निस्कपट हिरदय ले परभू के आदर खातिर ये काम करव। 23 जऊन कुछू घलो तुमन करथव, अपन पूरा मन लगाके करव। ये समझके कि तुमन परभू खातिर करथव, मनखेमन खातिर नइं। 24 तुमन जानथव कि ईनाम के रूप म, तुमन ला परभू ले एक बिरासत मिलही। काबरकि ओह परभू मसीह ए, जेकर सेवा तुमन करत हव। 25 जऊन ह खराप काम करथे, ओह अपन खराप काम के परतिफल पाही, काबरकि परमेसर ह काकरो संग पखियपात नइं करय।
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