5 एकरसेति, अपन ओ सुभावमन ला मार डारव, जऊन मन संसारिक अंय—जइसने कि बेभिचार, असुधता, काम-वासना, खराप लालसा अऊ लोभ जऊन ह मूरती-पूजा सहीं अय।
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5 एकरसेति, अपन ओ सुभावमन ला मार डारव, जऊन मन संसारिक अंय—जइसने कि बेभिचार, असुधता, काम-वासना, खराप लालसा अऊ लोभ जऊन ह मूरती-पूजा सहीं अय।
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