दक्खिन अऊ उत्तर के राजा
2 "अब, मेंह तोला सच बात बतावत हंव: फारस म तीन अऊ राजामन होहीं, अऊ ओकर बाद एक चौथा राजा घलो होही, जऊन ह आने जम्मो राजामन ले बहुंत अधिक धनी होही। जब ओह अपन धन ले सक्ति पा लीही, तब ओह जम्मो झन ला यूनान के राज के बिरूध भड़काही। 3 तब एक सक्तिसाली राजा के उदय होही, जऊन ह बड़े सक्ति ले राज करही अऊ ओह अपन मन मुताबिक करही। 4 ओकर उदय होय के बाद, ओकर राज ह टूट जाही अऊ चारों दिग म बंट जाही। येह ओकर संतानमन करा नइं जाही, अऊ न ही ओकर सक्ति ओ राज के ऊपर होही, काबरकि ओकर राज ला ओकर ले लूटके आने मन ला दे दिये जाही।
5 "दक्खिन के राजा ह सक्तिसाली हो जाही, पर ओकर ही एक सेनापति ह ओकर ले घलो जादा सक्तिसाली हो जाही अऊ अपन खुद के राज ऊपर बड़े सक्ति ले सासन करही। 6 कुछू बछर के बाद, ओमन सहयोगी हो जाहीं। दक्खिन के राजा के बेटी ह उत्तर के राजा करा एक संधि करे बर जाही, पर ओकर करा ओकर राज के सक्ति नइं रहिही, अऊ उत्तर के राजा अऊ ओकर सक्ति घलो नइं बांचही। ओ दिनमन म, दक्खिन के राजा के बेटी ला अऊ संग म ओकर साही रकछक अऊ ओकर ददा11:6 या लइका अऊ ओकर मदद करइया ला धोखा दिये जाही।
7 "ओकर परिवार के एक जन ह ओकर जगह लेय बर ठाढ़ होही। ओह उत्तर के राजा के सेना ऊपर चढ़ई करही अऊ ओकर किला म घुसर जाही; ओह ओमन ले लड़ही अऊ बिजयी होही। 8 ओह ओमन के देवतामन ला, ओमन के धातु के मूरतीमन ला अऊ ओमन के सोन अऊ चांदी के कीमती चीजमन ला घलो जपत कर लीही अऊ अपन संग मिसर देस ले जाही। कुछू बछर तक, ओह उत्तर के राजा ला एके झन छोंड़ दीही। 9 तब उत्तर के राजा ह दक्खिन के राजा के राज ऊपर चढ़ई करही, पर अपन ही देस ला फेर लहुंट जाही। 10 ओकर बेटामन लड़ई के तियारी करहीं अऊ एक बड़े सेना इकट्ठा करहीं, जऊन ह न रोके जा सकनेवाला बाढ़ सहीं तेजी ले आघू बढ़ही अऊ लड़ई ला ओकर किला तक ले जाहीं।
11 "तब दक्खिन के राजा कोरोधित होके आघू बढ़ही अऊ उत्तर के राजा ले लड़ई करही; उत्तर के राजा ह एक बड़े सेना खड़े करही, पर ओह हार जाही। 12 जब ये बड़े सेना ला ले लिये जाही, तब दक्खिन के राजा ह घमंड ले भर जाही अऊ कतको हजार मनखेमन ला मार डारही, तभो ले ओह बिजयी बने नइं रह सकही। 13 काबरकि उत्तर के राजा ह एक आने सेना खड़े कर लीही, जऊन ह ओकर पहिले के सेना ले बड़े होही; अऊ बहुंत बछर के बाद, पूरा तियारी करके, ओह एक बड़े सेना ला लेके आघू बढ़ही।
14 "ओ दिनमन म, बहुंते झन दक्खिन के राजा के बिरूध खड़े होहीं। तुम्हर अपन मनखेमन के बीच म, जऊन मन हिंसक सुभाव के अंय, ओमन बिदरोह करहीं, ताकि दरसन ह पूरा होवय, पर ओमन ला सफलता नइं मिलही। 15 तब उत्तर के राजा ह आके सैनिकमन के घेरा डालही अऊ एक किलावाले सहर ऊपर कब्जा कर लीही। दक्खिन के सेना म बिरोध करे के सक्ति नइं होही; अऊ त अऊ ओमन के सबले बने सैनिक दल करा घलो सामना करे के सक्ति नइं होही। 16 हमला करइया ह जइसे चाहही, वइसे करही; ओकर सामना कोनो नइं कर सकहीं। ओह अपनआप ला ओ सुघर देस म स्थापित करही अऊ ओकर करा ओला नास करे के सक्ति होही। 17 ओह अपन जम्मो राज के सक्ति के संग आय के ठान लीही अऊ ओह दक्खिन के राजा के संग एक संधि करही। अऊ ओकर राज ला जीते बर ओ राजा ला अपन एक बेटी बिहाव म दीही, पर ओकर योजना ह सफल नइं होही या ओकर ले ओला कोनो मदद नइं मिलही। 18 तब ओह अपन धियान समुंदर तीर म लगाही अऊ ओमा ले कतको ला अपन अधिकार म ले लीही, पर एक सेनापति ह ओकर अहंकार के अन्त कर दीही अऊ ओकर अहंकार के मुताबिक ओकर ले बदला लीही। 19 येकर बाद, ओह अपन ही देस के किलामन कोति लहुंटही, पर ओह लड़खड़ाके गिर जाही अऊ ओकर नामोनिसान मिट जाही।
20 "तब जऊन ह ओकर जगह लीही, ओह राज वैभव ला बनाय रखे बर एक लगान इकट्ठा करइया ला पठोही। पर कुछू बछर के भीतर, ओह नास हो जाही, पर ओकर बिनास कोरोध या लड़ई म नइं होही।