राजा, जऊन ह अपनआप ला बड़े बनाथे
36 "राजा ह अपन मन मुताबिक करही। ओह अपनआप ला जम्मो देवतामन ले ऊंच अऊ बड़े बनाही अऊ देवतामन के परमेसर के बिरूध अइसन बात कहिही, जऊन ह कभू नइं सुने गे होही। ओह तब तक सफल होही, जब तक कि कोप के समय ह पूरा नइं हो जाही, काबरकि जऊन बात ठहिराय गे हवय, ओह जरूर पूरा होही।