44 "ओ राजामन के समय म, स्वरग के परमेसर ह एक अइसने राज ला स्थापित करही, जऊन ह कभू नास नइं होही, अऊ न ही येकर ऊपर कोनो आने ह सासन करही। ये राज ह ओ जम्मो राजमन ला चूर-चूर कर दीही अऊ ओमन के अन्त कर दीही, पर येह खुद सदाकाल तक बने रहिही। 45 येह ओ चट्टान के दरसन के अर्थ अय, जऊन ह मनखेमन के दुवारा नइं, पर अपनआप एक पहाड़ ले कटके अलग होय रिहिस—एक चट्टान, जऊन ह लोहा, कांसा, माटी, चांदी अऊ सोन ला कुटा-कुटा कर दे रिहिस।
"महान परमेसर ह राजा ला देखाय हवय कि भविस्य म का होवइया हे। ये सपना ह सच ए अऊ येकर अर्थ बिसवासयोग्य अय।"