24 "तुम्हर मनखे अऊ तुम्हर पबितर सहर9:24 यरूसलेम बर सत्तर ‘सात’ के आदेस देय गे हवय कि ओमन अपराध करई छोंड़ देवंय, पाप ला खतम कर देवंय, बुरई बर पछताप करंय, अपनआप म धरमीपन लानंय, दरसन अऊ अगमबानी के बात म मुहर लगाय जावय अऊ महा पबितर स्थान के अभिसेक करे जावय।
25 "ये बात ला जानव अऊ समझ लव: यरूसलेम के फेर स्थापना अऊ पुनरनिरमान बर बचन के निकले के समय ले लेके अभिसिक्त जन तक, याने कि सासक के आवत तक सात9:25 या सात हप्ता ‘सात’ अऊ बासठ9:25 या बासठ हप्ता ‘सात’ के समय ठहिराय गे हवय। येकर पुनरनिरमान, गलीमन अऊ एक खाई के संग होही, पर येह कठिन समय म होही। 26 बासठ ‘सात’ के बाद अभिसिक्त जन ह मार डारे जाही अऊ कुछू नइं होही। सासन करइया के मनखेमन आहीं अऊ सहर अऊ पबितर-स्थान ला नास कर दीहीं। एक बाढ़ के सहीं अन्त आ जाही: आखिरी तक लड़ई होवत रहिही, अऊ उजाड़ करे के निरनय करे जा चुके हवय। 27 ओह बहुंते जन के संग एक ‘सात’9:27 या हप्ता बर एक करार के पुस्टि करही। ‘सात’ के बीच म ही, ओह बलिदान अऊ भेंट चघाय के अन्त कर दीही। अऊ मंदिर म एक नफरत के चीज ला स्थापित करही, जऊन ह उजाड़ के कारन बनही। येह तब तक होवत रहिही, जब तक कि ठहिराय गे समय के आखिरी म ओकर ऊपर बिनास ला नइं उंडेल दिये जाही।"