मसीह म जिनगी
1 पहिली तुमन अपन अपराध अऊ पाप के कारन मर गे रहेव। 2 ये अपराध अऊ पाप म रहत, तुमन ये संसार के रीति अऊ सैतान के पाछू चलत रहेव, जऊन ह अकास के सासन करइया ए अऊ येह ओ आतमा अय, जऊन ह अब ओमन म काम करथे, जऊन मन परमेसर के हुकूम नइं मानंय। 3 हमन जम्मो झन एक समय येमन के बीच, हमर देहें के लालसा म दिन बितावत रहेंन अऊ देहें अऊ मन के ईछा ला पूरा करत रहेंन, अऊ ये किसम ले बाकि मानव-जाति सहीं, सुभाव ले कोरोध के संतान रहेंन।