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निरगमन 18

17 ससजब, "जऊन ेंकरत हस, ओह सहहय18 अइसन ेंअऊ मनखे, मन करआथें, मन जमअपनआप बहुंथकरहू। बर बहुंे; ेंएकझन नइकर सकस19 एकरसि ; ेंसलवत , अऊ परमसर रहयेंपरमसर आघमनखमन परतििि बन अऊ ओमन झगरपरमसर कर20 ओमन ओकर ियम अऊ ििमन िकर, अऊ ओमन ि ओमन कइसिनगअऊ ओमन कइसबरतकर21 पर जममनखमन मनखमन ांे—अइसन मनखे, जऊन मन परमसर भय नथें, ईमनदमनखे, जऊन मन ईमकमई िरहिें—अऊ मन हजर-हज, ौ-ौ, पचस-पचअऊ दस-दस मनखमन ऊपर अधिठहिे। 22 मन जममनखमन बर ियधकर, पर ओमन कठिमलकर; सधरन मलसलओमन करहलकरही, बरकि ओमन ांटहीं। 23 कहूं ेंकरथस अऊ परमसर अइसनकरे, ेंसहकरलईक रहिे, अऊ जममनखमन मन अपन-अपन घर ीं।"

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