5 अऊ का तुमन उत्साह के ओ बचन ला भुला गे हवव, जऊन म परमेसर ह तुमन ला बेटा कहिके संबोधित करथे? येह कहिथे,
"हे मोर बेटा, परभू के ताड़ना ला हल्का झन समझ,
अऊ जब ओह तोला दबकारथे, त हिम्मत झन हार,
6 काबरकि परभू ह ओकर ताड़ना करथे, जऊन ला ओह मया करथे,
अऊ ओह हर ओ मनखे ला दंड देथे, जऊन ला ओह बेटा बना लेथे।"
7 दुख-तकलीफ ला ताड़ना समझके सह लेवव; परमेसर ह तुमन ला अपन बेटा जानके तुम्हर संग बरताव करत हवय। काबरकि का अइसने कोनो बेटा हवय, जेकर ताड़ना ओकर ददा ह नइं करय? 8 हर एक झन के ताड़ना होथे, पर कहूं तुम्हर ताड़ना नइं होईस, त तुमन नजायज संतान अव, अऊ सही के बेटा नो हव। 9 हमन के हर एक के सारीरिक ददा हवंय, जऊन मन हमर ताड़ना करथें अऊ हमन एकर खातिर ओमन के आदर करथन। तब हमन ला हमर आतमा के ददा के अधीन, अऊ जादा रहना चाही ताकि हमन जीयत रहन।