5 तमन अपन जनग ल रपय-पईस क मह-मय ल दर रखव अऊ जऊन कछ तमहर कर हवय, ओम सतस रहव, कबरक परमसर ह कह हवय,
"मह तल कभ नइ छडव;
मह तल कभ नइ तयगव।"
6 एकरसत हमन बधडक कहथन,
"परभ ह मर सहयक ए; मह नइ डरव।
मनख ह मर क कर सकथ?"
5 तमन अपन जनग ल रपय-पईस क मह-मय ल दर रखव अऊ जऊन कछ तमहर कर हवय, ओम सतस रहव, कबरक परमसर ह कह हवय,
"मह तल कभ नइ छडव;
मह तल कभ नइ तयगव।"
6 एकरसत हमन बधडक कहथन,
"परभ ह मर सहयक ए; मह नइ डरव।
मनख ह मर क कर सकथ?"