23 पहिली बहुंत पुरोहितमन रिहिन, पर ओमन अपन सेवा ला पूरा नइं कर सकिन काबरकि ओमन मर गीन; 24 पर यीसू ह सदाकाल बर जीयथे; ओकर पुरोहित पद ह सदाकाल बर ए। 25 एकरसेति, ओह ओमन के पूरा उद्धार कर सकथे, जऊन मन ओकर जरिये परमेसर करा आथें, काबरकि ओह ओमन खातिर बिनती करे बर हमेसा जीयत हवय।
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