23 पहिली बहुंत पुरोहितमन रिहिन, पर ओमन अपन सेवा ला पूरा नइं कर सकिन काबरकि ओमन मर गीन; 24 पर यीसू ह सदाकाल बर जीयथे; ओकर पुरोहित पद ह सदाकाल बर ए। 25 एकरसेति, ओह ओमन के पूरा उद्धार कर सकथे, जऊन मन ओकर जरिये परमेसर करा आथें, काबरकि ओह ओमन खातिर बिनती करे बर हमेसा जीयत हवय।
26 अइसने महा पुरोहित ह हमर जरूरत ला पूरा करथे, जऊन ह पबितर, निरदोस अऊ सुध ए; ओह पापीमन ले अलग करे गे हवय अऊ स्वरगमन ले ऊंचा उठाय गे हवय। 27 आने महा पुरोहितमन सहीं, ओला दिन-प्रतिदिन पहिली अपन खुद के पाप खातिर अऊ तब मनखेमन के पाप खातिर बलिदान चघाय के जरूरत नइं ए। ओह अपनआप ला ओमन के पाप बर बलिदान चघाके, ये काम ला सदाकाल बर एकेच बार म पूरा कर दीस।