हबक्कूक के सिकायत
2 हे यहोवा, मेंह कब तक मदद बर तोर ले गोहार लगावत रहंव,
पर तेंह नइं सुनत हस?
या मेंह कब तक चिल्लावत रहंव, "हिंसा!"
पर तेंह नइं बचात हस?
3 तेंह काबर मोला अनियाय ला देखे बर मजबूर करथस?
काबर तेंह गलत काम ला सहत हस?
मोर आघू म बरबादी अऊ हिंसा होवथे;
झगड़ा अऊ बिबाद बहुंत होवत हे।
4 येकर कारन नियम-कानून ह ढीला पर गे हवय,
नियाय मिलत नइं ए।
दुस्टमन धरमीमन ला घेर डारे हवंय,
जेकर से सही नियाय नइं मिलत हवय।