3 एकरसेति, जऊन बात तुमन अंधियार म कहे हवव, ओह दिन के अंजोर म सुने जाही, अऊ जऊन बात तुमन भीतर के खोली म मनखेमन के कान म चुपेचाप कहे हवय, ओला घर के छानी ऊपर ले खुलेआम बताय जाही।
Publicidade
Publicidade
3 एकरसेति, जऊन बात तुमन अंधियार म कहे हवव, ओह दिन के अंजोर म सुने जाही, अऊ जऊन बात तुमन भीतर के खोली म मनखेमन के कान म चुपेचाप कहे हवय, ओला घर के छानी ऊपर ले खुलेआम बताय जाही।