फरीसी अऊ लगान लेवइया के पटंतर
9 यीसू ह ये पटंतर ओमन बर कहिस, जऊन मन अपनआप ला बहुंत धरमी अऊ आने मन ला तुछ समझंय। 10 "दू झन मनखे मंदिर म पराथना करे बर गीन; ओमा के एक झन फरीसी रिहिस अऊ एक झन लगान लेवइया। 11 फरीसी ह ठाढ़ होईस अऊ अइसने पराथना करन लगिस, ‘हे परमेसर, मेंह तोर धनबाद करत हंव कि मेंह आने मनखेमन सहीं लालची, बेईमान अऊ बेभिचारी नो हंव, अऊ मेंह ये लगान लेवइया के सहीं घलो नो हंव। 12 मेंह हप्ता म दू दिन उपास रखथंव अऊ मेंह अपन जम्मो कमई के दसवां भाग तोला देथंव।’
13 "पर लगान लेवइया ह दूरिहा म ठाढ़ होईस। अऊ त अऊ ओह स्वरग कोति आंखी उठाके देखे के हिम्मत घलो नइं करिस, पर ओह अपन छाती ला पीट-पीटके कहिस, ‘हे परमेसर, मोर ऊपर दया कर, मेंह एक पापी मनखे अंव।’
14 "मेंह तुमन ला कहत हंव कि ओ फरीसी ह नइं, पर ये लगान लेवइया ह परमेसर के आघू म धरमी गने गीस, जब ओह अपन घर गीस। काबरकि जऊन ह अपनआप ला बड़े समझथे, ओला दीन-हीन करे जाही, अऊ जऊन ह अपनआप ला दीन-हीन करथे, ओला बड़े करे जाही।"