चरवाहा अऊ स्वरगदूतमन
8 उहां लकठा के मैदान म, कुछू चरवाहामन रथिया अपन भेड़ के झुंड के रखवारी करत रहंय। 9 तब परभू के एक स्वरगदूत ह ओमन करा परगट होईस, अऊ परभू के महिमा के तेज ओमन के चारों कोति चमकिस, अऊ ओमन डरा गीन। 10 पर स्वरगदूत ह ओमन ला कहिस, "झन डरव! मेंह तुम्हर बर बड़े आनंद के सुघर संदेस लाने हवंव, जऊन ह जम्मो मनखेमन बर होही। 11 आज राजा दाऊद के नगर म तुम्हर बर एक उद्धार करइया जनमे हवय; अऊ ओहीच ह मसीह परभू अय। 12 अऊ तुम्हर बर एकर ये चिनहां होही कि तुमन एक लइका ला कपड़ा म लपटाय अऊ कोटना म सुते पाहू।"
13 तब अचानक ओ स्वरगदूत के संग स्वरगदूतमन के एक बड़े दल परगट होईस अऊ ओमन परमेसर के महिमा करत ये कहत रहंय,
14 "सबले ऊंच स्वरग म परमेसर के महिमा
अऊ धरती म ओ मनखेमन ऊपर सांति होवय, जऊन मन ले ओह खुस हवय।"