34 "सचेत रहव, नइं तो तुम्हर हिरदय ह खराप जिनगी, मतवारपन अऊ जिनगी के चिंता करे म लग जाही, अऊ ओ दिन ह एक ठन फांदा के सहीं अचानक तुम्हर ऊपर आ जाही।
34 "सचेत रहव, नइं तो तुम्हर हिरदय ह खराप जिनगी, मतवारपन अऊ जिनगी के चिंता करे म लग जाही, अऊ ओ दिन ह एक ठन फांदा के सहीं अचानक तुम्हर ऊपर आ जाही।
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