12 " ‘कहूं ओह येला धनबाद देय बर चघाथे, त ये धनबाद-बलिदान के संग, ओह जैतून तेल म सनाय बिगर खमीर के बने मोटा-मोटा रोटी, बिगर खमीर के बने तेल म चुपरे पातर-पातर रोटी, अऊ बने ढंग से गुंथाय अऊ तेल म सनाय बहुंत चिक्कन पीसान के बने मोटा-मोटा रोटी चघावय। 13 धनबाद के मेल-बलिदान के संग, ओह खमीर मिले मोटा-मोटा रोटी के चढ़ावा चघावय। 14 ओह हर किसम के रोटी म ले एक-एक ठन रोटी बलिदान के रूप म लानय; येह यहोवा के हिस्सा होही; येह ओ पुरोहित के अय, जऊन ह मेल-बलिदान के लहू ला बेदी के चारों कोति छिंचथे। 15 धनबाद के मेल-बलिदान के मांस ला ओहीच दिन खाय जावय, जऊन दिन ओला चघाय जाथे; बिहनियां होवत तक ओमा ले कुछू झन बांचय।
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