35 तब जबदी के बेटा याकूब अऊ यूहन्ना ओकर करा आके कहिन, "हे गुरू, हमन चाहथन कि जऊन कुछू हमन तोर ले मांगबो, ओही ला तेंह हमर बर कर।"
36 ओह पुछिस, "तुमन का चाहथव कि मेंह तुम्हर बर करंव?"
37 ओमन कहिन, "तोर राज म जब तेंह सिंघासन म बईठबे, त हमर दूनों म के एक झन ला तोर जेवनी अऊ दूसर ला तोर डेरी कोति बईठन देबे।"
41 जब आने दस चेलामन ये बात ला सुनिन, त ओमन याकूब अऊ यूहन्ना ऊपर गुस्सा करिन। 42 एकरसेति यीसू ह ओमन ला एक संग अपन लकठा म बलाके कहिस, "जइसने कि तुमन जानथव, जऊन मन आनजातमन के हाकिम समझे जाथें, ओमन आनजातमन ऊपर परभूता करथें अऊ ओमन के बड़े अधिकारीमन ओमन ऊपर अधिकार जमाथें। 43 तुमन के संग अइसने नइं होवय। पर जऊन ह तुमन म बड़े होय चाहथे, ओह तुम्हर सेवक बनय, 44 अऊ जऊन ह सबले पहिली होय चाहथे, ओह जम्मो झन के गुलाम बनय। 45 काबरकि मनखे के बेटा ह अपन सेवा करवाय बर नइं आईस, पर एकर खातिर आईस कि ओह आने मन के सेवा करय अऊ बहुंत झन के छुड़ौती बर अपन परान ला देवय।"
बरतिमाई अंधरा देखन लगथे
(मत्ती 20:29-34; लूका 18:35-43)