25 जब तुमन ठाढ़ होके पराथना करव, त कहूं तुम्हर मन म काकरो बर कुछू बिरोध हवय, त ओला माफ करव, ये खातिर कि तुम्हर ददा जऊन ह स्वरग म हवय, तुम्हर अपराध ला छेमा करही। 26 अऊ कहूं तुमन माफ नइं करव, त तुम्हर ददा परमेसर घलो जऊन ह स्वरग म हवय, तुम्हर अपराध ला छेमा नइं करही।11:26 कुछू पुराना हस्तलिपि म ये पद नइं मिलय।"