एक हांथ के लकवा मारे मनखे
1 यीसू ह सभा-घर म फेर गीस अऊ उहां एक मनखे रहय, जेकर एक हांथ ला लकवा मार दे रिहिस। 2 उहां कुछू झन ओकर ऊपर दोस लगाय बर मऊका खोजत रहंय। एकरे बर ओमन ये देखत रिहिन कि ओह बिसराम के दिन म ओला बने करथे कि नइं। 3 यीसू ह जेकर हांथ ला लकवा मारे रिहिस ओला कहिस, "जम्मो के आघू म ठाढ़ हो जा।"
4 तब ओह मनखेमन ले पुछिस, "बिसराम के दिन म कानून के मुताबिक का ठीक ए? भलई करई या फेर बुरई करई? काकरो परान बचई या हतिया करई?" पर ओमन चुपेचाप रिहिन।
5 यीसू ह ओमन के हिरदय के कठोरता ला जानके उदास होईस, अऊ ओमन ऊपर गुस्सा होके चारों खूंट देखिस अऊ ओ मनखे ला कहिस, "अपन हांथ ला लमा।" ओह अपन हांथ ला लमाईस अऊ ओकर हांथ ह पूरा बने हो गीस।