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मरकुस 4:35-41

35 ओहीच दिन संझा के बखत, ओह अपन चेलामन ला कहिस, "आवव, हमन झील के ओ पार चलन।" 36 भीड़ ला पाछू छोंड़के, ओमन जइसने यीसू रिहिस, वइसने ओला अपन संग डोंगा म ले गीन। उहां ओकर संग अऊ डोंगामन घलो रहंय। 37 तब एक बड़े भारी आंधी आईस अऊ पानी के बड़े-बड़े लहरा उठिस, जेकर कारन पानी ह डोंगा म हमाय लगिस अऊ डोंगा ह बुड़े बर होवत रहय। 38 यीसू ह डोंगा के पाछू म गद्दी ऊपर सोवत रहय। तब चेलामन ओला उठाके कहिन, "हे गुरू, का तोला कोनो फिकर नइं ए कि हमन पानी म बुड़त हवन?"

39 ओह उठके आंधी ला दबकारिस अऊ पानी के लहरामन ला कहिस, "सांत हो जावव, थम जावव।" तब आंधी ह थम गीस अऊ एकदम सांत हो गीस।

40 ओह अपन चेलामन ला कहिस, "तुमन काबर डरावत हवव? का तुमन ला अब घलो मोर ऊपर बिसवास नइं ए?"

41 ओमन अब्बड़ डरा गे रिहिन अऊ एक-दूसर ला पुछन लगिन, "येह कोन ए? अऊ त अऊ आंधी अऊ पानी के लहरामन घलो एकर हुकूम मानथें।"

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