2 छै दिन के बाद, यीसू ह पतरस, याकूब अऊ यूहन्ना ला एक ठन ऊंचहा पहाड़ ऊपर ले गीस। उहां ओमन के छोंड़ अऊ कोनो नइं रिहिस। तब ओमन के आघू म यीसू के रूप ह बदल गीस। 3 ओकर ओनहा ह झक पंर्रा हो गे अऊ अइसने चमके लगिस कि संसार म कोनो अइसने उज्जर नइं कर सकय। 4 अऊ उहां ओमन ला एलियाह अऊ मूसा दिखिन, जऊन मन यीसू के संग गोठियावत रहंय।9:4 बहुंत पहिली एलियाह ह एक अगमजानी रिहिस अऊ मूसा ह यहूदीमन के एक खास अगुवा।
5 तब पतरस ह यीसू ला कहिस, "हे गुरू! हमन के इहां रहई बने अय। एकरसेति हमन तीन ठन मंडप बनाथन—एक ठन तोर बर, एक मूसा बर अऊ एक एलियाह बर।" 6 (ओह नइं जानत रहय कि का कहे जावय, काबरकि ओमन अब्बड़ डरा गे रहंय।)
7 तब एक ठन बादर ओमन ला ढांप लीस अऊ ओ बादर म ले ये अवाज आईस, "येह मोर मयारू बेटा ए, एकर बात ला सुनव।"
8 तब अचानक जब ओमन चारों कोति देखिन, त यीसू के छोंड़ अऊ कोनो ला अपन संग नइं देखिन।
9 जब ओमन पहाड़ ले उतरत रिहिन, त यीसू ह ओमन ला हुकूम दीस कि जब तक मनखे के बेटा ह मरे म ले नइं जी उठय, तब तक जऊन कुछू तुमन देखे हवव, कोनो ला झन बतावव। 10 ओमन ये बात ला अपन मन म रखिन अऊ ये बिचार करन लगिन कि "मरे म ले जी उठे" के का मतलब होथे?
11 तब ओमन यीसू ले पुछिन, "कानून के गुरूमन काबर कहिथें कि पहिली एलियाह के अवई जरूरी अय।"
12 यीसू ह ओमन ला ये जबाब दीस, "ये बात सही अय कि एलियाह पहिली आही, अऊ जम्मो चीज ला ठीक करही। पर मनखे के बेटा के बारे म ये काबर लिखे हवय कि ओह अब्बड़ दुख उठाही अऊ तुछ समझे जाही? 13 पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि एलियाह ह आ चुके हवय अऊ जइसने कि ओकर बारे म लिखे हवय—ओमन जइसने चाहिन, वइसने ओकर संग बरताव करिन9:13 इहां जब यीसू ह एलियाह के नांव लेथे, त ओकर मतलब यूहन्ना बतिसमा देवइया अय, जऊन ह एलियाह सहीं रिहिस। (मत्ती 11:13-14; 17:10-13)।"
परेत आतमा धरे छोकरा के बने होवई
(मत्ती 17:14-21; लूका 9:37-43)