42 "अऊ कोनो मनखे मोर ऊपर बिसवास करइया ये छोटे मन ले कोनो के पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओकर बर बने होतिस कि एक ठन बड़े जांता के पथरा ला ओकर घेंच म बांधके ओला समुंदर म फटिक दिये जावय। 43 कहूं तोर हांथ ह तोर पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओला काट डार। तोर बर लूलवा होके सदाकाल के जिनगी म प्रवेस करई ह बने अय, एकर बनिस्पत कि दूनों हांथ के रहत, तोला नरक के आगी म डारे जावय, जऊन ह कभू नइं बुतावय। 44 जिहां,
" ‘जऊन कीरामन ओमन ला खाथें, ओमन नइं मरंय,
अऊ आगी ह कभू नइं बुतावय।’9:44 कुछू पुराना हस्तलिपि म ये पद नइं मिलय।
45 अऊ कहूं तोर गोड़ ह तोर पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओला काट डार। तोर बर येह बने अय कि खोरवा होके सदाकाल के जिनगी म प्रवेस कर, एकर बनिस्पत कि दूनों गोड़ के रहत, तोला नरक म डारे जावय। 46 जिहां,
" ‘जऊन कीरामन ओमन ला खाथें, ओमन नइं मरंय,
अऊ आगी ह कभू नइं बुतावय।’9:46 कुछू पुराना हस्तलिपि म ये पद नइं मिलय।
47 अऊ कहूं तोर आंखी ह तोर पाप म गिरे के कारन बनथे, त ओला निकाल दे। तोर बर येह बने अय कि एक आंखी ले कनवां होके परमेसर के राज म प्रवेस कर, एकर बनिस्पत कि दूनों आंखी के रहत, तोला नरक म डार दिये जावय, 48 जिहां,
" ‘जऊन कीरामन ओमन ला खाथें, ओमन नइं मरंय,
अऊ आगी ह कभू नइं बुतावय।’9:48 यसा 66:24