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मत्ती 11

पछतनइकरइयसहरमन ि

20 तब सहरमन िलगि, िां ओह सबलचमतककरिि, पर सहरमन पछतनइकरि21 कहि, "िा, ! िा, तसा। जऊन चमतकमन कर, यदि अऊ सहर करि, ओमन बहुंपहिकपड़ा ओढअऊ बईठकपछतकर ि22 पर ेंमन कहत ि ििअऊ दसहर दसकहूं सहलईक ी। 23 अऊ ें कफरनह! ेंअकतक उठे! नइं! ेंल-लचले। बरकि जऊन चमतककर, यदि सदसहर करि, सहर आज तक बनरहिि24 पर ेंकहत ि ििसदसहर दसदसकहूं सहलईक ी।"

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