13 मेंह ओमन ले एकर कारन पटंतर म गोठियाथंव:
"ताकि देखत ले घलो ओमन झन देख सकंय,
अऊ सुनत ले घलो ओमन झन सुन सकंय या समझ सकंय।
14 ओमन के बारे म यसायाह अगमजानी के ये अगमबानी ह पूरा होथे:
" ‘तुमन सुनहू जरूर, पर कभू नइं समझहू,
अऊ तुमन देखहू जरूर, पर कभू नइं सुझही।
15 काबरकि ये मनखेमन के हिरदय ह कठोर हो गे हवय;
अऊ येमन अपन कान ला बंद कर ले हवंय,
अऊ येमन अपन आंखी ला मुंद ले हवंय।
नइं तो येमन अपन आंखीमन ले देखतिन,
अपन कानमन ले सुनतिन,
अपन हिरदय ले समझतिन अऊ मोर कोति फिरतिन,
अऊ मेंह येमन ला चंगा कर देतेंव।’