32 "तब ओकर मालिक ह ओ सेवक ला बलाईस अऊ कहिस, ‘हे दुस्ट सेवक! मेंह तोर जम्मो करजा ला माफ करेंव, काबरकि तेंह मोर ले बिनती करय। 33 जइसने मेंह तोर ऊपर दया करे रहेंव, वइसने का तोला अपन संगी सेवक ऊपर दया नइं करना चाही?’ 34 गुस्सा होके ओकर मालिक ह ओला सजा देवइयामन के हांथ म सऊंप दीस कि ओह तब तक ओमन के हांथ म रहय, जब तक कि ओह जम्मो करजा ला नइं पटा देवय।
35 "यदि तुमन अपन भाई ला अपन हिरदय ले छेमा नइं करहूं, त स्वरग म रहइया मोर ददा ह घलो तुमन म के हर एक के संग अइसनेच करही।"