18 "रामाह सहर म रोये अऊ बहुंते बिलाप करे के अवाज सुनई दीस,
राहेल ह अपन लइकामन खातिर रोवत रिहिस,
अऊ ओह नइं चाहत रिहिस कि कोनो ओला सांतवना देवंय,
काबरकि ओकर लइकामन मर गे रिहिन2:18 राहेल ह इहां इसरायल के मनखेमन ला दरसाथे, जऊन मन बहुंत दुख सहिन।।"2:18 यर 31:15