26 तुमन के संग अइसने नइं होवय। पर जऊन ह तुमन म बड़े होय चाहथे, ओह तुम्हर सेवक बनय, 27 अऊ जऊन ह तुमन म पहिली होय चाहथे, ओह तुम्हर गुलाम बनय। 28 जइसे कि मनखे के बेटा ह अपन सेवा करवाय बर नइं आईस, पर एकर खातिर आईस कि ओह आने मन के सेवा करय अऊ बहुंत झन के छुड़ौती बर अपन परान ला देवय।"
दू झन अंधरामन आंखी पाथें
(मरकुस 10:46-52; लूका 18:35-43)