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मत्ती 22

मरमनखमन उठई अऊ ी-ि

23 ओहिसदमन करआईन, जऊन मन कहिि मरमनखमन उठई नइवयओमन ि, 24 "ू, कहहवय ि यदि मनखिगर मर वय, ओकर िधविकरय अऊ अपन बर पईदकरय22:24 ब्यव 25:5-625 हमर झन ििपहििकरि, पर ओह िगर मर अऊ अपन घरवअपन बर ों26 सरअऊ सरजमों अइसनईसों ों मर 27 आखि, ईलगन घलमर 28 तब मरमनखमन उठ, ओह ों कर घरवी? बरकि ों झन ओकर िकरिि"

29 ओमन जब, "मन गलत समझत हव, बरकि मन परमसर बचन परमसर मरनइनत हव30 मरमनखमन उठ, मनखमन िकरहीं अऊ ओमन ििी; ओमन वरग वरगदतमन सहीं ीं। 31 मरमनखमन उठपरमसर मन कहहवयमन नइपढ़े हवव, 32 ेंअबहम परमसर, इसहपरमसर अऊ परमसर ? ओह मरमन नइं, पर यतमन परमसर अय"

33 नके, मनखमन उपदचकिईन

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