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Mateus 23

ोंपन ितउन

1 तब मनखअऊ अपन मन कहि: 2 "अऊ फरमन िें। 3 एकरसि, ओमन जऊन कहिें ओलनव अऊ करवपर ओमन सहीं झन करव, बरकि ओमन जइसनकहिें वइसननइकर4 ओमन ांधथे, अऊ ओलमनखमन ांऊपर लदक ें, पर ओमन ओलबर अपन गरघलउठनइ

5 "ओमन अपन जममनखमन बर करथें। ओमन बर कर-चकर 23:5 ताबीज याने एक किसम के डिब्बा, जऊन म परमेसर के बचन के पद रहिथे। बनअपन ां अऊ पहिरथें अऊ अपन कपड़ा लमलर लगवें। 6 वनरमन आदर ठऊर अऊ यहमन सभा-घर सबलबनआसन बईठई ओमन बनलगथे। 7 बजजगह आदर ोंकई अऊ मनखमन कहई ओमन बनलगथे।

8 "पर मन अपन झन कहवव, बरकि हर ििएक हवय, अऊ मन जमझन ई-भअव9 धरतअपन ददझन कहव, बरकि हर एकददहवय, जऊन वरग हवय10 मन अपन िघलझन कहवव, बरकि हर एकिहवय ि मस11 जऊन मन जमबड़े अय, ओह हर वक बनय12 बरकि जऊन अपनआप बड़े समझथे, ओलन-हकरी, अऊ जऊन अपनआप न-हकरथे, ओलबड़े करी।

अऊ फरमन ऊपर ठन ि

13 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ि! मन मनखमन बर वरग कर थवमन ओमवव अऊ ओमन वन वव, जऊन मन ओमिकरथें।

14 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ! मन िधवमन घर टथव अऊ बर लमा-लमपरथनकरथवएकरसि, मन कठसजिलही।23:14 कुछू पुराना हस्तलिपि म ये पद नइं मिलय।

15 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ि! मन एक झन अपन यहिसवबर समुंदर अऊ धरतऊपर िरथव, अऊ जब ओह हर िसवे, मन ओलअपन नरक लइकसहीं बनथव

16 "धरअगमन, हर ऊपर ि! मन कहिथव, यदि िकसम े, ओकर मतलब नइवय, पर यदि िकसम े, ओह अपन कसम े।’ 17 धरमनखमन! कतबड़े अयिजऊन पबितर बने?23:17 निर 40:9-11 18 मन घलकहिथव, यदि कसम े, ओकर मतलब नइवय, पर यदि चघेंकसम े, ओह अपन कसम े।’ 19 धरमनखमन! कतबड़े अयें, जऊन ेंपबितर बने? 20 एकरसि जऊन कसम े, ओह ओकर अऊ ओकर ऊपर रखजमकसम े। 21 अऊ जऊन िकसम े, ओह ओकर अऊ ओमरहइयघलकसम े। 22 अऊ जऊन वरग कसम े, ओह परमसर िंसन अऊ ओकर ऊपर बईठइयघलकसम े।

23 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ि! मन अपन मसजइसनि ा, ौंअऊ दसवां थव,23:23 लैव्य 27:30 पर मन महतजइसनि ि, दयअऊ िसवअनदकरथव23:23 होसे 6:6; यर 9:23 हर बर उचिअय ि ममन करव अऊ सर अनदघलझन करव24 धरअगमन! मन उडइयथव, पर थव23:24 लैव्य 11:20-23, 40

25 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ि! मन कटअऊ िांजथव, पर तर े, ओमन अऊ ट-खसगय जमन भरहव26 धरफरमन ो! पहिकटअऊ तरांजव, तब ओमन िघली।

27 "ोंी, अऊ फरमन, मन ि! मन कबर सहीं अव, जऊन िघर िखथे, पर तर रदमनखमन ़ा अऊ जमअसभररहिे। 28 ओहिसम े, मन मनखमन िधरमिखथव, पर तर मन ोंअऊ अधरम भरहवव

29 "ोंी, अऊ फरमन, हर ऊपर ि! मन अगमजमन कबर बनथव अऊ धरममन कबर सजथव, 30 अऊ मन कहिथव, यदि हमन अपन रखमन ें, हमन अगमजमन हतिकरई ओमन नइें31 िसम े, मन थव ि मन ओमन अव, जऊन मन अगमजमन ि32 तब मन अपन रखमन ों़े घघरभर थव

33 "ांपमन ो! जहरिांमन ो! मन नरक सजकइसनबचहू? 34 एकरसि, ेंहर करअगमजी, अऊ िअऊ मन पठवत ओमकतझन मन रहअऊ ऊपर चघू; कतझन मन अपन सभा-घर रहअऊ सहर-सहर ओमन सतू। 35 िसम े, जमधरममन लहू, जऊन धरतऊपर हवयधरमिलहिजकरयलहतक, जऊन मन िअऊ ; जमहर ऊपर आही। 36 ेंमन सच कहत , जम, ़ी मनखमन ऊपर ी।

37 "यरसलसहर! यरसलसहर! ेंअगमजमन रथस अऊ मन करपठे, ओमन ेंपथररथसेंकतेंि लइकमन वइसन, जइसनकरअपन िांमन अपन लथे, पर ेंनइहय38 , घर उजपड़े हवय39 ेंकहत ि ेंतब तक नइसकस, जब तक ि ेंनइकहस, धइन ओह, जऊन परभांआथे।’ "

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