29 "ओ दिनमन म, बिपत पड़े के तुरते बाद,
" ‘सूरज ह अंधियार हो जाही,
अऊ चंदा ह अपन अंजोर नइं दीही;
तारामन अकास ले गिर जाहीं,
अऊ अकास के सक्तिमन हलाय जाहीं।’
29 "ओ दिनमन म, बिपत पड़े के तुरते बाद,
" ‘सूरज ह अंधियार हो जाही,
अऊ चंदा ह अपन अंजोर नइं दीही;
तारामन अकास ले गिर जाहीं,
अऊ अकास के सक्तिमन हलाय जाहीं।’